About Nari Ka Sambal
महात्मा गांधी’ का कथन है कि –विकास का अर्थ होता है “मानव जीवन के हर पहलू सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक पुनर्निर्माण या पुनरुद्धार |
वैसे ही ख़बरों का अद्भुत संसार है पत्रकारिता | आज पूरी दुनिया में सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक चेतना का अद्भुत संचार हो रहा है, यही चेतना मनुष्य के विकास का परिचायक होती है| शायद यही कारण है कि मेरे मनोमष्तिष्क में भी इसी चेतना ने दस्तक दी हो | वैसे अनायास कुछ भी नहीं होता | बचपन से ही पढने का जुनून सवार था | हम भाई बहनों का बचपन प्रतिदिन नंदन, चम्पक, चंदामामा, चाचा चौधरी आदि बाल साहित्य की पुस्तकों का इंतजार करते बीता | फिर कुछ बड़े हुए तो युगधर्म, सरिता, मुक्ता, साप्ताहिक हिंदुस्तान, आगे हिंदी डाइजेस्ट, नवनीत, कादम्बिनी, उपन्यास आदि पर भी अपनी दीवानगी की हद पूरी की | तब मैंने कई पत्र सरिता, मुक्ता को भी लिखे थे जो कभी-कभी छप जाया करते थे, अफ़सोस उनका संग्रह आज मेरे पास उपलब्ध नहीं है | तब मुझे लगता यदि मैंने अपनी रचनाएं इन पत्र–पत्रिकाओं में भेजी तो क्या ये छप पाएंगी| भेजने में संकोच होता | समय के साथ–साथ माता-पिता भाई-बहनों के प्रोत्साहन ने मुझे मेरी लेखन कला को बनाए रखने में संजीवनी का काम किया |
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